Tuesday, May 19, 2009

उसी शहर में

उसी शहर में नाल गड़ी है मेरी
उसी शहर में दाल पकी है मेरी
उसी शहर में रहते मेरे दोस्त
उसी शहर में बीबी-बच्चे
उसी शहर में खाल खिंची है मेरी

उसी शहर में बहुत दिनों तक
रहने से दुख होता है
उसी शहर में बहुत दिनों के बाद
लौट आने से सुख होता है.

2 comments:

  1. Bahut hee sundar kavita. Saadhuvaad. Log kahte hain ki hum shahar me basate hain...lekin shaayad shahar hum me bastaa hai. Aur isi ke chalte aisee sundar kavitaayen janm leti hain.
    www.jitjao.blogspot.com

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  2. सर्वप्रथम तो स्वागत है आपका इस संजाल जगत् में.
    भविष्य में आपकी और सक्रिय उपस्थिति निरन्तर अभिरुचि प्रधान प्रयोक्ताओं से सम्वाद बनाएगी, ऐसी आशा है।

    इसे पढ़कर "बहुत दिनों तक चूल्हा रोया,चक्की रही उदास .... बहुत दिनों के बाद" के शिल्प की सुगन्धी- सी भर गई। बधाई।

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