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Thursday, May 21, 2009
सुमिरन
दुख में सुमिरन
सुख में सुमिरन
करने वाले बदल गये
कारण सुख के बदल गये
कारण दुख के बदल गये
मन की संसद
मन की सत्ता
संविधान को करे निहत्था
मन का चोर पकड़ने वाली
पुलिस कहाँ से आये
हमने अवगुन के गुन गाये.
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ध्रुव पद
http://atmaramsharma.blogspot.com/
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कहीं पहाड़ के पीछे तो कहीं पानी में,कहीं दिन डूबता...
रोटी की तरह भी दिखता है चाँद
सुमिरन
ढाई अक्षर
उसी शहर में
About Me
ध्रुव शुक्ल, कवि कथाकार
११ मार्च १९५३ को जन्म. भोपाल में निवास. उसी शहर में और अमर टॉकीज (दो उपन्यास) खोजो तो बेटी पापा कहाँ हैं फिर वह कविता वही कहानी एक बूँद का बादल हम ही हममें खेलें (चार कविता संग्रह) हिचकी (एक कहानी संग्रह)
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